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केरल की कलरीपायट्टु कला का प्रदर्शन देख सांस्कृतिक धरोहर से रूबरू हई छात्राएं

चंडीगढ। स्पिक मैके व डीएवी गर्ल्स कॉलेज के हैरिटेज क्लब के संयुक्त तत्वावधान में केरल से आए कलरीपायट्टु वल्लभट्ट कलारी ग्रुप की ओर से छात्राओं को मार्शल आर्ट की हैरतअंगेज प्रस्तुति देकर छात्राओं में जोश भर दिया। कॉलेज प्रिंसिपल डॉ मीनू जैन ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम संगीत विभाग अध्यक्ष डॉ नीता द्विवेदी व पंजाबी विभाग अध्यक्ष डॉ गुरशरन कौर की देखरेख में हुआ। कार्यक्रम की शुरूआत कलारी वंदना में शंख बजाकर की गई।
मार्शल आर्ट के ग्रुप लीडर राजीव केपी ने कहा कि इसे विश्व की सबसे प्राचीन और सर्वाधिक कुशल मार्शल आर्ट में से एक माना जाता है। कलरीपायट्टू, व्यक्तिगत युद्ध प्रशिक्षण की एक प्रणाली है। जिसमें निहत्थे युद्ध के लिए त्वरित सजगता विकसित करने, लाठी, खंजर, चाकू, भाले, तलवार, ढाल इत्यादि हथियारों पर कुशल महारत हासिल करने के उद्देश्य से परिकल्पित अभ्यास शामिल हैं। कलरीपायट्टु के प्रशिक्षण की शुरुआत पूरे शरीर के तेल मालिश से की जाती है। ताकि शरीर ढीला और लचीला बने। चाट्टम (कूद), ओट्ट्म (दौड़) और मरिचिल (कलाबाजी) जैसी गतिविधियां भी इसके अभिन्न अंग हैं। साथ ही तलवार, कटार, भाला, मुग्दर और धनुष-बाण जैसे हथियारों का इस्तेमाल करना भी सिखाया जाता है। इस दौरान मार्शल आर्ट सदस्यों ने तलावार से मसाज करके सभी को हैरान कर दिया। कार्यक्रम के दौरान थविल व चेंडा ड्रम के कलाकारों ने वाद्य यंत्र बजाकर समां बांध दिया।
डॉ मीनू जैन ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर बचाए रखने के लिए इस प्रकार के आयोजन मील का पत्थर साबित होते है। कलाकारों की उम्दा प्रस्तुति देखकर छात्राओं को वर्षों पुरानी कला से जुडने का अवसर मिला। छात्राएं दूसरे राज्यों की कला व संस्कृति से रूबरू हो, इसलिए भविष्य में भी इस प्रकार के आयोजन करवाए जाएंगे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में स्पिक मैके के केंद्रीय एडवाइजर पंकज मल्होत्रा व स्टेट को-ओर्डिनेटर चक्षु दत्ता ने सहयोग दिया।

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