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रॉबर्ट वाड्रा की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, ED का दावा – गलत तरीके से कमाए करीब 58 करोड़ रुपये

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के सूत्रों के अनुसार, वाड्रा ने अपनी कंपनियों के जरिए गलत तरीके से लगभग 58 करोड़ रुपये कमाए हैं। यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में जमीन सौदे से जुड़ा है।

पूछताछ में रॉबर्ट वाड्रा ने तीन दिवंगत लोगों पर आरोप लगाए
ED की जांच में वाड्रा ने कई सवालों के जवाब देने से बचते हुए जिम्मेदारी तीन दिवंगत लोगों — एच.एल. पाहवा, राजेश खुराना और महेश नागर — पर डाल दी। हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई दस्तावेज नहीं दिए।

क्या है मामला?
रॉबर्ट वाड्रा की बढ़ सकती हैं मुश्किलें, ED का दावावाड्रा की कंपनियां स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. और BBTPL ने कम पूंजी के बावजूद 3.5 एकड़ जमीन मात्र ₹7.50 करोड़ में खरीदी, जबकि असली कीमत ₹15 करोड़ थी। भुगतान का झूठा रिकॉर्ड तैयार किया गया और स्टाम्प ड्यूटी बचाने के लिए गलत जानकारी दी गई। आरोप है कि यह जमीन तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के प्रभाव से ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज को हाउसिंग लाइसेंस दिलाने के लिए दी गई थी। बाद में जमीन का कमर्शियल लाइसेंस बनाकर इसे दबाव और फाइलों में हेरफेर से ₹58 करोड़ में DLF को बेच दिया गया।

ईडी की कार्रवाई और जब्ती
ईडी ने PMLA के तहत वाड्रा समेत कई लोगों और कंपनियों पर चार्जशीट दाखिल की है। ₹38.69 करोड़ मूल्य की 43 अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं, जिनमें बीकानेर, गुरुग्राम, मोहाली, अहमदाबाद, नोएडा और फरीदाबाद की जमीन, फ्लैट और वाणिज्यिक इकाइयां शामिल हैं।
आरोप साबित होने पर 3 से 7 साल की जेल और संपत्ति जब्त की जा सकती है।

घटनाक्रम

  • 2006-2008: जमीन खरीदी, लाइसेंस के लिए गलत जानकारी देकर फाइल पास कराई गई।

  • 2008-2012: DLF को करोड़ों का भुगतान, लाइसेंस जारी और नवीनीकरण।

  • 2013: ऑडिट में गड़बड़ियों का खुलासा।

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