अमरूद बाग घोटाला: विजिलेंस ने आरोपी को किया काबू, 12 करोड़ की होगी रिकवरी
अमरूद बाग घोटाला: विजिलेंस ने आरोपी को किया काबू, 12 करोड़ की होगी रिकवरी

अब तक 7 सरकारी कर्मचारी और 16 आम लोग गिरफ्तार, 86 करोड़ की राशि सरकारी खाते में जमा
मोहाली: पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने अमरूद बाग घोटाले में एक और आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी ने सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत कर गलत तरीके से 12 करोड़ रुपये का मुआवजा हासिल किया था। विजिलेंस की जांच में सामने आया कि यह पूरी राशि आरोपी ने अपनी पत्नी के खातों में डलवाई थी।
इस मामले में अब तक 7 सरकारी कर्मचारी और 16 आम लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। वहीं, घोटाले के आरोपियों ने अब तक 86 करोड़ रुपये सरकारी खजाने में जमा करवाए हैं। इस आरोपी से 12 करोड़ की रिकवरी के बाद यह राशि 100 करोड़ तक पहुंच जाएगी।
कैसे हुआ घोटाला? ऐसे रची गई अमरूद के बाग की फर्जी कहानी
जांच में सामने आया कि एयरोट्रोपोलिस प्रोजेक्ट के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया के दौरान, आरोपी सुखदेव सिंह ने गांव बाकरपुर में 3 कनाल 16 मरले जमीन खरीदी। इसके बाद उसने मुख्य आरोपी भूपिंदर सिंह के साथ मिलकर पहले से अमरूद के बाग होने की झूठी कहानी गढ़ी और सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से अधिक मुआवजा लेने की साजिश रची।
इस धोखाधड़ी को सफल बनाने के लिए बागवानी विकास अधिकारी से मिलीभगत कर पेड़ों का गलत मूल्यांकन कराया गया। पेड़ों को तीन साल से अधिक पुराना और फल देने वाला साबित किया गया, जिससे अधिक मुआवजा मिलने का रास्ता साफ हुआ।
फर्जी रजिस्टर बनाकर किया रिकॉर्ड में हेरफेर
आरोपी सुखदेव सिंह और भूपिंदर सिंह के बीच एक समझौता हुआ था, जिसके तहत:
सुखदेव सिंह सरकारी कर्मचारियों को रिश्वत देने का खर्च उठाएगा।
भूपिंदर सिंह अपनी पहुँच और प्रभाव के जरिए गमाडा (GMADA) से अधिक मुआवजा दिलवाने का काम करेगा।
दोनों ने सरकारी रिकॉर्ड में हेराफेरी कर असली खसरा गिरदावरी (2016-2021) को नष्ट कर दिया और 2019 में नया फर्जी रजिस्टर तैयार किया।
माल पटवारी बाचित्र सिंह की मिलीभगत से यह सुनिश्चित किया गया कि भूमि रिकॉर्ड में अमरूद के पक्के बाग मौजूद होने का गलत विवरण जोड़ा जाए। इस धोखाधड़ी के चलते:
सुखदेव सिंह ने 2.40 करोड़ रुपये
उसकी पत्नी हरबिंदर कौर ने 9.57 करोड़ रुपये
गमाडा से प्राप्त किए।



