ChandigarhRayta Special

जल संकट पर सियासी संग्राम: पंजाब-हरियाणा जल विवाद पर CM भगवंत मान ने बुलाया विधानसभा का विशेष सत्र, हो सकता है बड़ा फैसला

चंडीगढ़, 5 मई 2025: पंजाब और हरियाणा के बीच भाखड़ा-ब्यास नदी जल वितरण को लेकर गहराता विवाद अब निर्णायक मोड़ पर है। जल संकट पर राजनीतिक और संवैधानिक बहस के बीच, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आज सुबह 11 बजे विधानसभा का विशेष सत्र बुलाया है। सत्र में हरियाणा को अतिरिक्त पानी न देने से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित होने की संभावना है।

 क्या है विवाद?

विवाद की शुरुआत 28 अप्रैल 2025 को हुई, जब भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) की बैठक में पंजाब ने यह स्पष्ट कर दिया कि वह हरियाणा को अतिरिक्त पानी नहीं दे सकता। पंजाब का कहना है कि राज्य खुद गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है और “मानवीय आधार पर दी जा रही मदद” अब संभव नहीं है।


 सीएम भगवंत मान का कड़ा रुख

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा:

“हरियाणा अपने हिस्से का पानी पहले ही इस्तेमाल कर चुका है। पंजाब अब सिर्फ अपने हक की बात करेगा। हम किसानों का हक किसी भी कीमत पर नहीं छीनने देंगे।”

उन्होंने यह भी संकेत दिए हैं कि अगर ज़रूरत पड़ी, तो सभी राजनीतिक दलों के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर यह मुद्दा उठाया जाएगा।


 विधानसभा सत्र का महत्व

राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया की अनुमति के बाद बुलाया गया यह विशेष सत्र एक राजनीतिक मोर्चे की तरह देखा जा रहा है, जिसमें पंजाब सरकार अपने रुख को कानूनी और संवैधानिक रूप देने की कोशिश करेगी। माना जा रहा है कि सत्र में पारित प्रस्ताव के बाद केंद्र पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की जाएगी।


 दोनों राज्यों की स्थिति

  • पंजाब: खुद सूखे और भूमिगत जल संकट से जूझ रहा है। खेती और पीने के पानी के लिए जल की मांग बढ़ी है।

  • हरियाणा: गर्मी और बढ़ती जल आवश्यकताओं के कारण पानी की भारी जरूरत महसूस कर रहा है।

दोनों राज्यों में इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठकें हो चुकी हैं, जिनमें अपने-अपने राज्य के हितों की पुरज़ोर वकालत की गई।


 विवाद के व्यापक असर

जल विवाद अब केवल राज्यों के बीच का राजनीतिक मुद्दा नहीं रह गया है। यह संवैधानिक अधिकार, संसाधनों के न्यायपूर्ण बंटवारे और कृषि जीवनरेखा से जुड़ा बड़ा प्रश्न बन चुका है। विवाद का असर इन क्षेत्रों पर पड़ेगा:

  • कृषि उत्पादन

  • पेयजल आपूर्ति

  • उद्योगों की कार्यक्षमता

  • राजनीतिक स्थिरता और केंद्र-राज्य संबंध

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button