12 फरवरी को माघ पूर्णिमा, गंगा स्नान से मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य
12 फरवरी को माघ पूर्णिमा, गंगा स्नान से मिलेगा अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य
वाराणसी: 12 फरवरी को माघ पूर्णिमा का पावन पर्व मनाया जाएगा। इसे महास्नान का पर्व भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से पूरे महीने किए गए तीर्थ स्नान का फल मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन जल में भगवान विष्णु का वास रहता है, इसलिए इसे नारायण से जुड़ने का शुभ अवसर माना जाता है।
माघ पूर्णिमा का महत्व
माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यकारी तिथि मानी जाती है। इस दिन किया गया गंगा स्नान अश्वमेध यज्ञ के बराबर फलदायी माना जाता है। स्कंद पुराण और पद्म पुराण में वर्णित है कि इस दिन स्नान, व्रत और दान करने से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
क्या करें माघ पूर्णिमा पर?
- गंगा स्नान: सूर्योदय से पहले किसी पवित्र नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है।
- व्रत और पूजा: भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत रखने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
- दान-पुण्य: इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, घी, कंबल और जरूरतमंदों को भोजन कराने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य मिलता है।
- सत्संग और मंत्र जाप: भगवान विष्णु और शिव के मंत्रों का जाप करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
महाकुंभ में अमृत स्नान
इस साल माघ पूर्णिमा के दिन महाकुंभ में भी अमृत स्नान का आयोजन किया जा रहा है। लाखों श्रद्धालु इस अवसर पर संगम में डुबकी लगाएंगे। धार्मिक मान्यता है कि इस स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
कैसा रहेगा शुभ मुहूर्त?
- पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 11 फरवरी रात 03:33 बजे
- पूर्णिमा तिथि समाप्त: 12 फरवरी रात 11:23 बजे
- स्नान और दान का सर्वश्रेष्ठ समय: सूर्योदय से पूर्व और ब्रह्म मुहूर्त
नारायण से जुड़ने का पर्व
शास्त्रों के अनुसार, माघ पूर्णिमा पर जल में भगवान विष्णु का निवास होता है। इसलिए इस दिन जल से जुड़े अनुष्ठान विशेष फलदायी होते हैं। भक्त इस अवसर पर विशेष रूप से “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं।




