Chandigarh

मनरेगा में ऐतिहासिक सुधार: ‘जी राम जी एक्ट’ से 125 दिन रोजगार, मजदूरी और पारदर्शिता को बढ़ावा – CM सैनी

चंडीगढ़ : हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि विकसित भारत – रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून, 2025 यानी ‘जी राम जी एक्ट’ ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को पूरी तरह भ्रष्टाचार-मुक्त और पारदर्शी बनाएगा। यह नया कानून मनरेगा की खामियों को दूर करते हुए श्रमिकों को अधिक कार्यदिवस, बढ़ी हुई मजदूरी और समय पर भुगतान की गारंटी देता है।

सोमवार को चंडीगढ़ में आयोजित प्रेस वार्ता में मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्रामीण श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश परिवारों के हित में यह ऐतिहासिक कदम उठाया है। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा, रणबीर गंगवा, कृष्ण कुमार बेदी, मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव राजेश खुल्लर और मीडिया सचिव प्रवीण आत्रेय भी मौजूद रहे।

उन्होंने कहा कि वीबी जी-राम जी कानून का उद्देश्य उन वास्तविक श्रमिक लाभार्थियों का समर्थन करना है, जिन्हें पिछली सरकारों ने धोखा दिया था। यह अधिनियम परियोजनाओं की वास्तविक समय में निगरानी की व्यवस्था करता है, मजदूरी भुगतान में पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। श्रमिकों को गारंटीकृत रोजगार बढ़ाकर अधिक मजदूरी देती है। ये श्रमिक अब भ्रष्ट ठेकेदारों, अधिकारियों या राजनेताओं की तिजोरियाँ भरने के लिए नहीं, बल्कि विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करेंगे।

पुरानी प्रणालियों को परिवर्तित करना आवश्यक

मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा योजना लगभग 20 वर्ष पहले शुरू की गई थी। मनरेगा और ऐसी ही अन्य कई योजनाओं की प्रकृति ही ऐसी होती है कि इन्हें तैयार किया जाता है, पारित किया जाता है, लागू किया जाता है और इनमें सुधार भी किया जाता है। मनरेगा के अंतर्गत कई समस्याएं सामने आईं, जैसे कि श्रमिकों के बजाय मशीनों का उपयोग करना, बजट का अत्यधिक अनुमान, पहले से पूर्ण की गई परियोजनाओं को दोबारा करना, और ऐसी ही कई कमियां देखने को मिलीं, लेकिन आज सच्चाई यह है कि देश, समाज और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पिछले 20 वर्षों में मूल रूप से बदल चुके हैं। ग्रामीण गरीबी वर्ष 2011-12 में जहां 25 प्रतिशत से अधिक थी, वहीं आज यह घटकर लगभग 5 प्रतिशत से भी नीचे आ चुकी है। इसका अर्थ है कि वर्तमान केंद्र सरकार की सकारात्मक नीतियों के कारण 25 प्रतिशत से अधिक लोग गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।

श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को मिला बढ़ावा

नायब सिंह सैनी ने कहा कि नए प्रावधानों के तहत, रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन करने से श्रमिकों की गारंटीशुदा मजदूरी को काफी बढ़ावा मिला है। इसके माध्यम से, सरकार श्रमिकों के जीवन स्तर में सुधार लाने का प्रयास कर रही है। इससे पूरे भारत वर्ष में एक ग्रामीण अकुशल श्रमिक की वार्षिक आय में औसतन 7 हजार रुपये से अधिक की बढ़ोतरी होगी। हरियाणा में मजदूरी दर ज्यादा है, इसलिए हर श्रमिक को कम से कम 10 हजार रुपये अधिक मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई योजना से न केवल काम के अधिक दिन सुनिश्चित होंगे, जिससे बेहतर वेतन मिलेगा, बल्कि अनिवार्य साप्ताहिक वेतन भुगतान (अधिकतम 15 दिनों तक की देरी की अनुमति के साथ) से श्रमिकों को समय पर बढ़ा हुआ वेतन प्राप्त होगा। इससे आर्थिक स्वतंत्रता और सशक्तिकरण सुनिश्चित होगा। इसे संभव बनाने के लिए, केंद्र सरकार ने इस वर्ष 1 लाख 51 हजार 282 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जबकि पिछले वर्ष यह राशि 88 हजार करोड़ थी।

 

65 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिकों को काम मिला

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के तहत इस वर्ष हरियाणा में 52 प्रतिशत से अधिक अनुसूचित जाति के श्रमिकों को तथा 65 प्रतिशत से अधिक महिला श्रमिकों को काम मिला है। यह काम वास्तव में उन्हें मिला है। पहले तो मशीनों से काम करवा लिया जाता था और उन्हें वास्तव में काम मिलता ही नहीं था। उन्होंने कहा कि इस योजना में अब कृषि के चरम मौसम के दौरान 60 दिनों का विराम शामिल किया गया है ताकि देश के किसान और मजदूर मिलकर काम कर सकें और मजदूरों को कृषि मौसम के दौरान उनके श्रम के लिए बाजार की उच्च दरें मिल सकें।

शोषण को रोकने के लिए किए गए तकनीकी उपाय

मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार से निपटने, शोषण को रोकने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि केवल वास्तविक श्रमिकों को ही पारदर्शिता के साथ उनका हक मिले, वीबी जी- राम जी योजना में कई उपाय किए गए हैं। बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और उपस्थिति से फर्जी कर्मचारियों, डुप्लिकेट जॉब कार्ड और फर्जी भुगतानों को रोका जा सकेगा। वेतन और भत्तों का सीधा, डिजिटल भुगतान इससे बिचौलियों, वेतन भुगतान में देरी और धन के दुरुपयोग की समस्या समाप्त हो जाएगी। जियो-टैगिंग और सैटेलाइट इमेजरी इस योजना के तहत बनाई गई प्रत्येक संपत्ति को जियो-टैग किया जाएगा और इसरो के भुवन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि भ्रष्ट ठेकेदारों या अधिकारियों द्वारा फर्जी परियोजनाओं का पंजीकरण न हो सके। उन्होंने कहा कि धन की हेराफेरी के लिए धोखे से बनाई गई फर्जी परियोजनाओं को रोकने के लिए, नए प्रावधानों को चार क्षेत्रों में बांटा जाएगा। जल संरक्षण, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका संसाधन और जलवायु संरक्षण। अब, यह योजना भ्रष्टाचार का अड्डा बनने के बजाय विकास में एक वास्तविक और ठोस योगदानकर्ता के रूप में काम करेगी।

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