हेमा मालिनी नहीं, मुमताज़ थीं पहली पसंद! ‘सीता और गीता’ की कास्टिंग का दिलचस्प किस्सा
सलीम–जावेद और रमेश सिप्पी के बीच असहमति के बाद बदली गई कास्टिंग ने रचा था बॉलीवुड इतिहास, फिल्म बनी ब्लॉकबस्टर
Asheesh srivastava
पहली पसंद बनीं मुमताज़, सलीम–जावेद थे पूरी तरह सहमत
बॉलीवुड की क्लासिक फिल्म ‘सीता और गीता’ (1972) को लेकर एक दिलचस्प कास्टिंग कहानी सामने आती है, जिसमें शुरुआत में हेमा मालिनी नहीं, बल्कि मुमताज़ को मुख्य भूमिका के लिए पहली पसंद माना गया था।
मुमताज़ की व्यस्तता ने बिगाड़ा फिल्म का प्लान
फिल्म के लेखक जोड़ी सलीम खान और जावेद अख्तर चाहते थे कि दोनों किरदारों, सीता और गीता को निभाने के लिए मुमताज़ को लिया जाए, क्योंकि उन्हें लगता था कि वही इस डबल रोल की इंटेंसिटी और रेंज के साथ न्याय कर सकती हैं।हालांकि उस दौर में मुमताज़ अपने करियर के पीक पर थीं और लगातार कई फिल्मों में व्यस्त रहने के कारण उन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए समय की कमी का हवाला दिया। इसी वजह से मामला आगे नहीं बढ़ सका।
रमेश सिप्पी का भरोसा और कास्टिंग का फैसला
इसके बाद निर्देशक रमेश सिप्पी ने हेमा मालिनी का नाम आगे बढ़ाया। दिलचस्प बात यह थी कि सलीम–जावेद को शुरुआत में इस फैसले पर संदेह था। उन्हें डर था कि हेमा मालिनी, जिन्होंने पहले एक गंभीर किरदार निभाया था, कहीं ‘गीता’ के चुलबुले और तेजतर्रार अंदाज़ को सही तरह से पकड़ नहीं पाएंगी।
लेकिन रमेश सिप्पी को हेमा मालिनी के टैलेंट पर पूरा भरोसा था। उन्होंने टीम को विश्वास दिलाया और आखिरकार हेमा मालिनी को फिल्म में कास्ट कर लिया गया।
सीता और गीता’ की रिलीज़ और ऐतिहासिक सफलता
नवंबर 1972 में रिलीज़ हुई ‘सीता और गीता’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया और हेमा मालिनी के करियर की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में से एक बन गई।




