वक्फ संशोधन कानून पर आज सुप्रीम सुनवाई, 72 याचिकाएं

नई दिल्ली,16 अप्रैल 2025 – वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को लेकर देशभर में मचे राजनीतिक और सामाजिक घमासान के बीच आज यह मामला पहली बार सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर सुनवाई के लिए पहुंचा है। दोपहर 2 बजे सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ – जिसमें जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन भी शामिल हैं – इस मामले पर सुनवाई करेगी।
कुल 72 याचिकाएं, बड़ी-बड़ी हस्तियां याचिकाकर्ता
सुप्रीम कोर्ट में वक्फ संशोधन अधिनियम की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली 72 याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन याचिकाओं में यह तर्क दिया गया है कि यह कानून संविधान के मौलिक अधिकारों जैसे कि:
अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार)
अनुच्छेद 15 (भेदभाव न करने का अधिकार)
अनुच्छेद 25-26 (धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत अधिकार)
अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यकों की सांस्कृतिक पहचान का अधिकार)
अनुच्छेद 300A (संपत्ति का अधिकार)
का उल्लंघन करता है।
बड़े नाम शामिल, यह सिर्फ कानूनी नहीं, सियासी लड़ाई भी
इस मामले को लेकर याचिकाएं दाखिल करने वालों में कई नामचीन नेता और संगठन शामिल हैं:
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
AAP विधायक अमानतुल्लाह खान
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी
SP सांसद जियाउर्रहमान बर्क
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा
कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद
RJD सांसद मनोज झा
IUML और JDU के नेता परवेज सिद्दीकी, सहित कई अन्य।
इसके साथ ही ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी याचिका दायर कर कानून को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया है।
वक्फ संशोधन कानून के समर्थन में भी मजबूत मोर्चा
केवल विरोध ही नहीं, इस कानून के पक्ष में भी कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं:
मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, असम और छत्तीसगढ़ जैसे सात राज्यों ने इसे “पारदर्शी और न्यायसंगत” कानून बताया है।
आदिवासी संगठनों ने इस कानून को जनजातीय अधिकारों की रक्षा के तौर पर समर्थन दिया है, यह कहते हुए कि पुराने वक्फ कानून के तहत उनकी जमीनें छिनी जा रही थीं।
केंद्र सरकार ने दाखिल की कैविएट, एकतरफा आदेश पर लगाई रोक
सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कैविएट दाखिल कर यह मांग की है कि कोई भी आदेश देने से पहले उसका पक्ष सुना जाए। क्योंकि याचिकाओं में कानून पर रोक लगाने की मांग भी की गई है, इसलिए केंद्र ने कोर्ट को एकतरफा आदेश देने से रोका है।
सियासत गरम: कोर्ट से पहले ही धमकियों और अल्टीमेटम का दौर
विरोध करने वाले कई संगठनों की तरफ से धमकी भरे बयान सामने आ चुके हैं कि अगर फैसला उनके खिलाफ गया तो “पूरे भारत को ठप” कर दिया जाएगा। वहीं, कई नेताओं ने इस मुद्दे को लेकर ममता बनर्जी सरकार और राज्य की कानून व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं।



