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भारत-पाकिस्तान एयरस्पेस टकराव, भारत ने 23 जुलाई तक बंद किया हवाई क्षेत्र

नई दिल्ली | 23 मई 2025 : भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने अब हवाई मार्गों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। भारत सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए पाकिस्तान के लिए अपने एयरस्पेस को 23 जुलाई 2025 तक बंद कर दिया है। इसके तहत अब पाकिस्तानी नागरिक और सैन्य विमानों को भारतीय हवाई क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने जारी किया NOTAM

भारतीय नागरिक उड्डयन मंत्रालय द्वारा जारी NOTAM (Notice to Airmen) के अनुसार, यह प्रतिबंध सुरक्षा चिंताओं और पाकिस्तान के हालिया रवैये को ध्यान में रखते हुए लागू किया गया है। यह कदम पहले से लागू प्रतिबंध की समयसीमा का विस्तार है।


पाकिस्तान का पलटवार: भारतीय विमानों के लिए 24 जून तक हवाई क्षेत्र बंद

जवाबी कार्रवाई में, पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी (PAA) ने भी नया NOTAM जारी करते हुए 24 जून 2025 तक भारतीय विमानों के लिए अपने एयरस्पेस को बंद कर दिया है। इस प्रतिबंध के तहत:

  • भारतीय रजिस्ट्रेशन, संचालन या स्वामित्व वाले सभी विमान शामिल हैं

  • सैन्य और वाणिज्यिक उड़ानों पर भी प्रतिबंध लागू होगा


विशेषज्ञों की राय: “भारत को सीमित असर, पाकिस्तान को गहरी मार”

पूर्व भारतीय राजनयिक दीपक वोहरा ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा:

पाकिस्तान की राष्ट्रीय एयरलाइन (PIA) पहले से ही आर्थिक रूप से डूब रही है। भ्रष्टाचार और पायलट लाइसेंस घोटालों ने उनकी साख को नुकसान पहुंचाया है। भारत के लिए यह प्रतिबंध प्रतीकात्मक है, जबकि पाकिस्तान की उड़ानें और एयरलाइन क्षेत्र इससे गहरे संकट में फंस सकते हैं।

वोहरा ने यह भी कहा कि भारत का घरेलू विमानन क्षेत्र 30-40% की वार्षिक दर से बढ़ रहा है, और यह प्रतिबंध भारतीय विमानन पर सीमित असर डालेगा। हालांकि, पश्चिम की ओर जाने वाली उड़ानों की दूरी बढ़ने से किराया ज़रूर महंगा हो सकता है।


ओलावृष्टि में फंसा इंडिगो विमान, पाकिस्तान ने नहीं दी मदद

इस बीच, एक मानवता को शर्मसार करने वाला वाकया भी सामने आया। एक इंडिगो विमान, जिसमें 220 से अधिक यात्री सवार थे, हाल ही में ओलावृष्टि में फंस गया था। पायलट ने लाहौर एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हवाई क्षेत्र के संक्षिप्त प्रयोग की अनुमति मांगी, जिसे स्पष्ट रूप से अस्वीकार कर दिया गया।

इस घटना में विमान के अग्रभाग को नुकसान पहुंचा, और यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई। इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हैं, और इसे “हवाई मानवता का अपमान” करार दिया जा रहा है।


कूटनीतिक स्थिति और बिगड़ने के संकेत

विश्लेषकों का मानना है कि यह हवाई क्षेत्र टकराव केवल तकनीकी मुद्दा नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते अविश्वास का प्रतीक है। आगे आने वाले समय में, इससे वाणिज्यिक उड़ानों, व्यापार और यात्रियों की सुविधा पर प्रत्यक्ष असर पड़ सकता है।

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