₹15 करोड़ की रहस्यमयी किताब: जानिए क्यों सिर्फ 3 लोग पढ़ पाएंगे इसे!

पटना: गांधी मैदान में आयोजित 41वें पटना बुक फेयर में दुनिया की सबसे महंगी किताब “मैं” का भव्य उद्घाटन हुआ। इस ग्रंथ की कीमत ₹15 करोड़ रखी गई है और यह केवल तीन प्रतियों में ही उपलब्ध है। उद्घाटन समारोह में रचनाकार रत्नेश्वर ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा की कहानी साझा की, जिसने पूरे बिहार में उत्साह का माहौल बना दिया।
ग्रंथ की खासियत यह है कि इसमें ज्ञान की परम अवस्था का रहस्य छुपा है। रत्नेश्वर ने बताया कि 7 सितंबर 2006 को उन्हें विशेष मुहूर्त में जगाया गया और उनके त्रिनेत्र जागृत हो गए। इस स्थिति में उन्होंने तीन घंटे चौबीस मिनट तक खरबों वर्षों की यात्रा की और ब्रह्म के निर्माण का अद्भुत दर्शन किया।
रत्नेश्वर का दावा है कि इस ग्रंथ में वही ज्ञान लिखा गया है जिसे पहले केवल महान द्रष्टाओं ने ही अनुभव किया। उन्होंने कहा, “मुझे मत मानो, जानने की राह पर चलो।” किताब की उच्च कीमत का उद्देश्य भी यही है कि लोग केवल सुनने के बजाय जानने की यात्रा पर निकलें।
इस किताब के प्रति उत्साह इतना बढ़ा कि पुस्तक मेले में इस ग्रंथ को देखने के लिए लोगों की लंबी कतारें लगीं। रत्नेश्वर ने पुस्तक का आवरण हटाने के साथ शंखनाद करवाया, और ग्रंथ की कुछ पंक्तियों को उपस्थित लोगों के सामने पढ़ा।



