असम विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को नहीं मिलेगा नमाज ब्रेक, 90 साल पुरानी परंपरा खत्म
असम विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को नहीं मिलेगा नमाज ब्रेक, 90 साल पुरानी परंपरा खत्म
असम की हिमंता बिस्वा सरमा सरकार ने विधानसभा में मुस्लिम विधायकों को दिए जाने वाले नमाज ब्रेक की दशकों पुरानी परंपरा को खत्म कर दिया है। यह परंपरा करीब 90 वर्षों से चली आ रही थी, लेकिन अब इसे औपचारिक रूप से समाप्त कर दिया गया है।
पिछले साल लिया गया था फैसला, अब किया गया लागू
मिली जानकारी के अनुसार, यह निर्णय पिछले साल अगस्त में ही लिया गया था, लेकिन इसे अब बजट सत्र के दौरान लागू किया गया है। पहले विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुस्लिम विधायकों को नमाज अदा करने के लिए विशेष ब्रेक दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।
सरकार का तर्क: सभी धर्मों के लिए समान नियम
इस फैसले को लेकर राज्य सरकार का तर्क है कि विधानसभा एक धर्मनिरपेक्ष संस्थान है और सभी विधायकों के लिए समान नियम होने चाहिए। इसीलिए अब किसी विशेष धर्म के लिए अलग से ब्रेक देने की परंपरा को समाप्त कर दिया गया है।
विपक्ष ने किया विरोध
सरकार के इस फैसले पर असम के विपक्षी दलों ने नाराजगी जताई है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह फैसला धार्मिक भेदभाव को बढ़ावा देता है और मुस्लिम विधायकों के धार्मिक अधिकारों का हनन करता है।
सरकार का रुख साफ
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा पहले भी धार्मिक तुष्टीकरण की नीतियों के खिलाफ अपनी राय रखते आए हैं। उनकी सरकार ने कई बार कहा है कि वे राज्य में किसी भी प्रकार की धार्मिक या साम्प्रदायिक राजनीति को बढ़ावा नहीं देंगे और सभी को समान अधिकार दिए जाएंगे।
असम में बढ़ते राजनीतिक तनाव
इस फैसले के बाद असम की राजनीति गरमा गई है। जहां एक ओर भाजपा समर्थक इस निर्णय का स्वागत कर रहे हैं, वहीं विपक्षी दल इसे मुस्लिम विधायकों के साथ अन्याय बता रहे हैं। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर आगे क्या राजनीतिक घटनाक्रम सामने आते हैं।



