“लैब टू लैंड” से बदलेगा खेती का भविष्य: कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा

नई दिल्ली/चंडीगढ़ | 24 जून 2025 : हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने आज नई दिल्ली में आयोजित ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ की समीक्षा बैठक में भाग लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘लैब टू लैंड’ दृष्टिकोण से भारतीय कृषि को नई दिशा मिलने वाली है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह अभियान किसानों की आय बढ़ाने और भारत को वैश्विक ‘फूड बास्केट’ बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।
खेतों में उतरेंगे वैज्ञानिक, बनेगी व्यावहारिक रणनीति
कृषि मंत्री ने बताया कि इस अभियान के तहत वैज्ञानिक सीधे खेतों में जाकर किसानों की समस्याएं समझ रहे हैं, जिससे तैयार हो रही कार्य योजना ज़मीनी सच्चाइयों पर आधारित होगी। “अब कृषि केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं, खेतों में उतर रही है,” राणा ने कहा।
रबी सीजन से पहले होगा लागू
उन्होंने जानकारी दी कि यह अभियान अब रबी सीजन से पहले भी चलाया जाएगा, जिससे हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों को बड़ा लाभ होगा। राणा ने कहा कि इससे न केवल उत्पादन में सुधार होगा, बल्कि फसल विविधीकरण, टिकाऊ खेती और जल संरक्षण जैसे क्षेत्रों में भी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
नकली खाद और कीटनाशकों पर सख्ती
बैठक में केंद्र सरकार द्वारा नकली खाद व कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की घोषणा का राणा ने स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण इनपुट मिलेंगे और फर्जी कृषि उत्पादों पर लगाम लगेगी।
वैज्ञानिक हस्तक्षेप से होगी फसल विविधता
राणा ने बताया कि हरियाणा सरकार क्षेत्रवार कार्य योजना बना रही है जिसमें दलहन, तिलहन, गन्ना, कपास जैसी फसलों पर वैज्ञानिक हस्तक्षेप को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) की क्षमताएं भी बढ़ाई जाएंगी।
“कृषि योजनाओं से नहीं, अनुभव से आगे बढ़ती है खेती”
कृषि मंत्री ने कहा, “कृषि केवल कागज़ी योजनाओं से नहीं, खेतों की मिट्टी से जुड़कर आगे बढ़ती है। यह अभियान वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर कृषि नवाचार को मजबूत करेगा।”
राष्ट्रीय स्तर पर जुटे विशेषज्ञ
इस समीक्षा बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान, विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) और प्रमुख कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सबका एकमत था कि ‘लैब टू लैंड’ का मॉडल भारत की कृषि क्रांति का अगला चरण बन सकता है।



