व्यवधान होते हैं, लेकिन सदन की कार्यवाही सुनिश्चित करना अध्यक्ष की जिम्मेदारी-स्पीकर हरविंद्र कल्याण

चंडीगढ़: हरियाणा विधानसभा के स्पीकर हरविंद्र कल्याण ने हाल ही में आयोजित मानसून सत्र पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि सदन में व्यवधान आना स्वाभाविक है, लेकिन अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह सदन की कार्यवाही को लगातार चलाते रहें। विशेष रूप से, पहले दिन हुए छह स्थगन के सवाल पर स्पीकर ने यह स्पष्ट किया कि व्यवधान के बावजूद, उनकी प्राथमिकता सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना है।
ऐतिहासिक मानसून सत्र: 120% कार्य उत्पादकता
हरविंद्र कल्याण ने मानसून सत्र को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस सत्र ने संसदीय परंपराओं को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि यह सत्र सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ और इसमें 21 घंटे 8 मिनट की कार्यवाही हुई, जो 120.37% कार्य उत्पादकता का प्रतीक रही। इस सत्र के दौरान 7 विधेयक पारित किए गए, और विधायकगणों ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की।
सत्र के दौरान सदन की उपस्थिति और भागीदारी
स्पीकर ने बताया कि सत्र 22 अगस्त से 27 अगस्त तक चला, और इस दौरान कुल 71, 72, और 70 विधायक सदन में मौजूद रहे। इसमें मुख्यमंत्री, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, और मंत्रियों की संख्या शामिल नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस सत्र में विधायकगणों ने अनुशासन और गंभीरता से बहस में हिस्सा लिया, जिससे सदन की गरिमा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया गया।
राज्यगीत का वादन: एक ऐतिहासिक पहल
स्पीकर ने यह भी बताया कि इस सत्र के समापन पर राज्यगीत का पहली बार वादन किया गया, जो एक ऐतिहासिक घटना थी। यह सदन की गरिमा को बढ़ाने और हरियाणा की सांस्कृतिक धरोहर को सम्मानित करने का एक अनूठा तरीका था।
शून्यकाल में विधायकों की सक्रियता
शून्यकाल के दौरान तीन दिन तक कार्यवाही चली, जिसमें 78 विधायकों ने भाग लिया। विभिन्न दलों के विधायकों ने अपने विचार साझा किए:
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भा.ज.पा. के 30 सदस्यों ने 99 मिनट,
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कांग्रेस के 34 सदस्यों ने 129 मिनट,
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इनेलो के 2 सदस्यों ने 7 मिनट,
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निर्दलीय विधायकों ने 10 मिनट तक अपनी बात रखी।



