शारिब हाशमी के परिवार पर संकट की नई लहर : पत्नी नसरीन हाशमी का कैंसर फिर उभरा
अभिनेता शारिब हाशमी की पत्नी नसरीन हाशमी का कैंसर एक बार फिर लौटा, पांच सर्जरी के बाद भी जारी है जिंदगी की जंग
Asheesh srivastava
मशहूर वेब सीरीज फैमिली मैन के चर्चित किरदार केके याद है। इन्ही का नाम है शारिब हाशमी । शारिब हाशमी की पत्नी नसरीन हाशमी को वर्ष 2018 में पहली बार कैंसर डायग्नोस हुआ था। उस समय से लेकर अब तक यह सफर बेहद कठिन और भावनात्मक रहा है। बीमारी ने कई बार वापसी की और हर बार परिवार को एक नई चुनौती का सामना करना पड़ा।
पांच सर्जरी के बाद भी नहीं रुकी बीमारी
जानकारी के अनुसार नसरीन हाशमी अब तक पांच बड़ी सर्जरी से गुजर चुकी हैं। इसके बावजूद यह बीमारी बार-बार रीलैप्स करती रही है, जिससे परिवार की चिंता लगातार बढ़ती गई।
छठी बार फिर लौटी गंभीर बीमारी
हाल ही में यह सामने आया है कि नसरीन हाशमी की बीमारी एक बार फिर लौट आई है। इस बार स्थिति पहले से ज्यादा गंभीर बताई जा रही है और डॉक्टरों की निगरानी में लगातार इलाज चल रहा है।

पॉडकास्ट में शारिब हाशमी का भावुक खुलासा
हाल ही में एक पॉडकास्ट बातचीत में शारिब हाशमी ने अपनी पत्नी की हालत को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि नसरीन लंबे समय से इस बीमारी से जूझ रही हैं और कई बार यह शरीर में वापस आ चुकी है। उन्होंने इसे जीवन का सबसे कठिन समय बताया।
इलाज जारी, उम्मीद अब भी कायम
परिवार ने साफ किया है कि इलाज लगातार चल रहा है और डॉक्टरों की टीम पूरी कोशिश कर रही है। शारिब हाशमी और उनका परिवार इस कठिन समय में भी उम्मीद नहीं छोड़ रहे हैं और सकारात्मक बने हुए हैं।
पत्नी की हिम्मत बनी परिवार की ताकत
शारिब हाशमी ने बताया कि उनकी पत्नी की हिम्मत और जुझारूपन पूरे परिवार के लिए प्रेरणा है। इतनी कठिन बीमारी के बावजूद नसरीन जिस साहस के साथ इसका सामना कर रही हैं, वह बेहद प्रेरणादायक है।
अस्पताल में हर पल साथ रहते हैं शारिब हाशमी
नसरीन हाशमी ने भी अपने पति की जमकर तारीफ की है। उन्होंने बताया कि शारिब अपने व्यस्त शेड्यूल के बावजूद अस्पताल में उनके साथ मौजूद रहते हैं। जब तक वह डिस्चार्ज नहीं होतीं, शारिब वहीं उनके पास बैठे रहते हैं।
संघर्ष से शुरू हुई प्रेम और सफलता की कहानी
शारिब हाशमी ने पहले भी बताया है कि उनके करियर के शुरुआती दिनों में नसरीन ने उनका पूरा साथ दिया। आर्थिक कठिनाइयों के समय उन्होंने न सिर्फ उन्हें सपोर्ट किया बल्कि आगे बढ़ने की प्रेरणा भी दी।
घर और सपनों के लिए बड़ा त्याग
संघर्ष के दौर में 2003 से साथ निभा रहा रिश्ता दोनों की शादी 27 दिसंबर 2003 को हुई थी। तब से लेकर आज तक यह रिश्ता हर उतार-चढ़ाव में एक-दूसरे का सहारा बना हुआ है। मुश्किल समय ने इस रिश्ते को और मजबूत किया है।
निष्कर्ष:
यह कहानी सिर्फ एक बीमारी या संघर्ष की नहीं, बल्कि उस अटूट रिश्ते की भी है जो दर्द और मुश्किलों के बीच भी उम्मीद और भरोसे की रोशनी बनाए रखता है।



