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राजकुमार बड़जात्या की प्रेरक कहानी: Amitabh Bachchan के छोटे भाई अजिताभ बच्चन के रिसेप्शन से शुरू हुआ ‘गीत गाता चल’ का सफर

एक मुलाकात ने 17 वर्षीय सचिन पिलगांवकर को दिलाई थी राजश्री फिल्मों में एंट्री

Asheesh srivastva
भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठित प्रोडक्शन कंपनी Rajshri Productions के दिग्गज निर्माता राजकुमार बड़जात्या की जयंती पर फिल्म जगत उन्हें याद कर रहा है। उनकी जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा आज भी प्रेरणा के रूप में सुनाया जाता है, जिसकी शुरुआत एक साधारण रिसेप्शन से हुई थी।
उस दौरान Amitabh Bachchan के छोटे भाई अजिताभ बच्चन के रिसेप्शन में राजकुमार बड़जात्या पहुंचे थे, जहां उनकी मुलाकात Jaya Bachchan से भी हुई।
इसी कार्यक्रम में उनकी नजर युवा कलाकार Sachin Pilgaonkar पर पड़ी, जिनकी उम्र उस समय मात्र 17 वर्ष थी। यहीं से एक नए फिल्मी सफर की नींव रखी गई।  राजकुमार बड़जात्या ने तुरंत सचिन के पिता से संपर्क कर राजश्री बैनर के लिए फिल्म प्रोजेक्ट पर काम करने की इच्छा जताई। शुरुआत में इसे एक सामान्य फिल्मी बातचीत माना गया, लेकिन कुछ दिनों बाद यह प्रस्ताव गंभीर रूप ले चुका था।
टैगोर की कहानी से बनी फिल्म
राजकुमार बड़जात्या ने जिस कहानी पर फिल्म बनाने का निर्णय लिया था, वह महान लेखक Rabindranath Tagore की रचना “अतिथि” पर आधारित थी। स्क्रिप्ट लेखन की जिम्मेदारी सचिन के पिता और मधुसूदन कालेलकर को दी गई।


 अधिकार विवाद और बड़ा मोड़
स्क्रिप्ट शांति निकेतन भेजे जाने के बाद वहां से जवाब आया कि यह कहानी उनकी नहीं है, इसलिए अधिकार देने का सवाल ही नहीं उठता। इस अप्रत्याशित जवाब ने पूरी टीम को चौंका दिया।
जन्म हुआ ‘गीत गाता चल’ का
इसके बाद 1975 में फिल्म “गीत गाता चल” रिलीज हुई, जिसका निर्देशन हिरेन नाग ने किया और संगीत रविंद्र जैन ने दिया। यह फिल्म सफल रही और सचिन पिलगांवकर के करियर के लिए मील का पत्थर साबित हुई।
 विरासत
राजकुमार बड़जात्या की यह कहानी आज भी बताती है कि सही मौके और सही पहचान किसी भी कलाकार की जिंदगी बदल सकते हैं।
2019 में उनके निधन के बाद भी उनकी फिल्मी सोच और संवेदनशील कहानी कहने का अंदाज लोगों के बीच जीवित है।

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