चुनाव आयोग का पलटवार: बिना अनुमति वोटर की पहचान सार्वजनिक करना है गलत, राहुल गांधी के आरोपों पर दिया कड़ा जवाब

चुनाव आयोग का पलटवार: राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ के बाद चुनाव आयोग ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सभी विवादित मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने ‘वोट चोरी’ जैसे आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि चुनाव आयोग न तो किसी राजनीतिक दल का पक्षधर है और न ही विपक्ष का।
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर के फोटो, नाम और पहचान बिना अनुमति सार्वजनिक करना चुनाव प्रक्रिया की गोपनीयता के खिलाफ है। उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि ऐसी गलतियां गलत संदेश देती हैं और मतदाता की निजता का उल्लंघन है। आयोग ने कहा, “अगर कोई संदेह है तो अदालत का सहारा लेना चाहिए, आरोप लगाने से पहले प्रक्रिया का पालन जरूरी है।”
भारतीय नागरिकता और वोटिंग अधिकार पर बड़ा स्पष्टिकरण
ज्ञानेश कुमार ने यह भी बताया कि भारत के संविधान के मुताबिक केवल भारतीय नागरिक ही सांसद और विधायक के चुनाव में वोट डालने के पात्र हैं। यदि कोई गैर-भारतीय व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल हो गया है, तो एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) प्रक्रिया में दस्तावेज़ प्रस्तुत करके अपनी राष्ट्रीयता साबित करनी होगी। जांच के बाद ऐसे लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे।
अन्य राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया कब शुरू होगी?
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में एसआईआर की शुरुआत कब होगी, यह चुनाव आयोग के तीनों सदस्यों के संयुक्त निर्णय पर निर्भर करेगा। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मशीन-पठनीय मतदाता सूची मतदाता की निजता के लिए खतरा हो सकती है, इसलिए इसकी प्रकृति पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
चुनाव परिणामों में गड़बड़ी के आरोपों पर आयोग का जवाब
रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा नतीजे घोषित होने के बाद, राजनीतिक दलों के पास 45 दिनों के भीतर चुनाव याचिका दायर करने का कानूनी विकल्प मौजूद है। ज्ञानेश कुमार ने कहा कि इस अवधि के बाद निराधार आरोप लगाना लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी निराधार आरोप जनता के विश्वास को प्रभावित करने की मंशा से लगाए जा रहे हैं, जिनका कोई औचित्य नहीं।



