करनाल में डीजीपी ने ली अधिकारियों की बैठक : गैंगस्टर कल्चर को बढ़ावा न देने की अपील, बोले- सिक्योरिटी कोई तमाशा नहीं

करनाल : मधुबन पुलिस अकादमी में रविवार को हुई बैठक में पूरे साल के अपराधों की गहन समीक्षा की गई। पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने बताया कि चाहे वह कॉन्ट्रैक्ट किलिंग हो, जबरदस्ती वसूली के मामले हों, ड्रग्स की सप्लाई रोकने की चुनौती हो या फिर क्राइम के हॉटस्पॉट, हर पहलू पर चर्चा हुई। 2025 के अनुभवों से क्या सीखा गया और 2026 में उन सीखो को कैसे लागू किया जाए, ताकि पुलिस की परफॉर्मेंस और बेहतर हो सके, इस पर अधिकारियों से सुझाव लिए गए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि 2026 में हरियाणा पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था 2025 से कहीं बेहतर होगी।
पुलिस महानिदेशक ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि किसी को भी सिक्योरिटी देना या वापिस लेना कोई तमाशा नहीं है। यह पूरी तरह इंटेलिजेंट इनपुट, खतरे के आकलन और फील्ड रिपोर्ट के आधार पर किया जाता है। जिन लोगों को वास्तविक खतरा है, उन्हें पूरा सिक्योरिटी कवर दिया जाता है, जबकि शौकिया तौर पर पुलिस पीछे लगवाने की मानसिकता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मधुबन पुलिस अकादमी में आयोजित अधिकारियों की बैठक के बाद डीजीपी ने अपराध, सुरक्षा व्यवस्था, रिश्वतखोरी, गैंगस्टर, जबरदस्ती वसूली, ड्रग्स और नए साल की तैयारियों को लेकर विस्तार से अपनी बात रखी।
रिश्वत लेने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को बर्खास्त करने के बयान और उसके बाद सामने आए मामलों पर डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि जो हो रहा है, वही उन्होंने कहा था। उन्होंने बताया कि उनके पास 311(2) का प्रावधान है, जिसके तहत अगर किसी मामले की जांच में देरी से पब्लिक इंटरेस्ट प्रभावित होता है, तो संबंधित रैंक के अधिकारी या कर्मचारी को बाहर किया जा सकता है।
डीजीपी ने बताया कि आम लोगों के तीन बड़े पेन प्वाइंट हैं। पहला, लोगों को धमकियां नहीं मिलनी चाहिए और उनसे जबरदस्ती वसूली नहीं मांगी जानी चाहिए। दूसरा, ड्रग्स की सप्लाई इस स्तर पर नहीं होनी चाहिए कि जो लेना भी नहीं चाहता, उसे भी आसानी से मिल जाए। तीसरा, जगह-जगह शराब पीने वालों और ड्रग्स पीने वालों के अड्डे नहीं बनने चाहिए, ताकि लोग वहां जाने के लिए मजबूर न हों। इन तीनों मुद्दों पर पुलिस ने लगातार मेहनत की है।



