1971 जैसा वार करने को तैयार थी भारतीय नौसेना, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में कराची पर था पूरा निशाना
अरब सागर में तैनात थी भारतीय नौसेना की ताकत, आदेश मिलते ही कराची पोर्ट पर बरसती आग
asheeesh srivastava
‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर भारतीय नौसेना की उस आक्रामक तैयारी की चर्चा फिर तेज हो गई है, जिसने पाकिस्तान को समुद्र में लगभग घेर लिया था। सैन्य सूत्रों और वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, भारतीय नौसेना ने अरब सागर में ऐसी रणनीतिक तैनाती कर रखी थी कि पाकिस्तान नौसेना के युद्धपोत कराची बंदरगाह से बाहर निकलने की हिम्मत नहीं जुटा सके।
रिपोर्ट्स के अनुसार, पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय नौसेना ने बेहद कम समय में अपनी युद्धक तैयारियां पूरी कर ली थीं। नौसेना के कैरियर बैटल ग्रुप, युद्धपोत, पनडुब्बियां और ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस जहाज उत्तरी अरब सागर में तैनात कर दिए गए थे। नौसेना के अधिकारियों ने बाद में खुलासा किया कि कराची पोर्ट समेत पाकिस्तान के कई सामरिक ठिकाने भारतीय मिसाइलों की रेंज में थे और केवल सरकार के अंतिम आदेश का इंतजार था।
सूत्रों के मुताबिक, भारतीय नौसेना की तैनाती इतनी प्रभावी थी कि पाकिस्तान नेवी को अपने जहाज बंदरगाहों के भीतर ही सीमित रखना पड़ा। कुछ जहाजों को ग्वादर और ईरान के नजदीकी समुद्री इलाकों की ओर हटाने की खबरें भी सामने आई थीं। इससे साफ हो गया था कि भारत ने समुद्री मोर्चे पर पाकिस्तान पर भारी दबाव बना दिया था।
सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उस समय नौसेना को सीधा हमला करने का आदेश मिलता, तो 1971 के ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ जैसी स्थिति बन सकती थी, जब भारतीय नौसेना ने कराची पोर्ट को भारी नुकसान पहुंचाया था। 1971 के युद्ध में भारतीय मिसाइल बोट्स ने पाकिस्तान के तेल भंडार और नौसैनिक संसाधनों को तबाह कर दिया था, जिसकी गूंज कई दिनों तक रही थी।
पिछले एक साल में भारतीय नौसेना ने अपनी समुद्री रणनीति और हमलावर क्षमता को और मजबूत किया है। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य में अगर ‘ऑपरेशन सिंदूर 2.0’ जैसी कोई स्थिति बनती है, तो भारतीय नौसेना पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक भूमिका में नजर आ सकती है।



