“इतिहास का सबसे महान बलिदान” – दशम पातशाह के परिवार की शहादत आज भी राष्ट्र सेवा की सबसे बड़ी प्रेरणा: CM सैनी

Veer Bal Diwas : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि दशम पातशाह गुरु गोबिन्द सिंह के परिवार के बलिदान से जुड़ी कहानी जितनी बार पढ़ेंगे, सुनेंगे और जानेंगे उतनी बार ही राष्ट्र हित में बड़ी से बड़ी कुर्बानी देने के लिए प्रेरित होंगे। मुख्यमंत्री शुक्रवार को सिरसा में आयोजित राज्य स्तरीय वीर बाल दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। राज्य के 3450 स्कूलों के 6 लाख विद्यार्थियों ने हिन्दी, पंजाबी, अंग्रेजी व संस्कृत विषयों पर आयोजित निबंध प्रतियोगिताओं में भाग लिया। इनमें हिन्दी में जीन्द की प्रियंका, पंजाबी में कैथल की चरणजीत कौर, संस्कृत में अम्बाला की रिद्वि तथा अंग्रेजी में अम्बाला की जसलीन कौर अव्वल रही। मुख्यमंत्री ने इन विद्यार्थियों को 21-21 हजार रुपए की नकद राशि प्रदान कर सम्मानित किया। इसके अलावा दूसरे स्थान के विजेताओं को 11-11 हजार रूपए तथा तीसरे स्थान के विजेताओं को 5100-5100 रुपए देकर पुरस्कृत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह वीर बाल दिवस समारोह दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह के छोटे साहिबजादों की अमर शहादत को समर्पित है। सिरसा की इस ऐतिहासिक धरा पर सबके बीच आकर उनका हृदय श्रद्धा और गर्व से भर उठा है। उन्होंने कहा कि आज उस महान विरासत को नमन कर रहे हैं, जिसने भारत की अस्मिता को बचाया। इसके साथ ही, मानवता को धर्म और सत्य के लिए सर्वोच्च बलिदान करने का मार्ग भी दिखाया।
CM नायब सिंह सैनी ने कहा कि इतिहास में ऐसी कोई मिसाल नहीं मिलती, जहां मासूम बच्चों ने धर्म की रक्षा के लिए दीवारों में जिंदा चिनवाना स्वीकार कर लिया हो, लेकिन झुकना स्वीकार नहीं किया हो। गुरू जी के परिवार के सभी सदस्यों ने एक सप्ताह के दौरान 20 से 27 दिसम्बर सन 1705 में धर्म व आमजन की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह सप्ताह इतिहास के पन्नों पर सदैव अंकित रहेगा।



