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FII की बिकवाली से क्यों कांप रहा भारतीय बाजार? अमेरिका-जापान की चाल ने बढ़ाई टेंशन

भारत नहीं, पूरी दुनिया की आर्थिक हलचल का असर

Asheesh srivastava
भारतीय शेयर बाजार में जारी FII Selling को सिर्फ भारत की कमजोरी समझना बड़ी भूल होगी। इसके पीछे पूरी दुनिया की बदलती आर्थिक तस्वीर काम कर रही है। अमेरिका की ऊंची ब्याज दरों से लेकर जापान की नई नीतियों तक, वैश्विक स्तर पर ऐसा माहौल बन चुका है जिसने विदेशी निवेशकों को इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया है।
अमेरिका की ब्याज दरों ने खींचा पैसा
US Federal Reserve लगातार ब्याज दरें ऊंची बनाए हुए है। इसका सीधा फायदा अमेरिकी बॉन्ड्स और डॉलर आधारित एसेट्स को मिल रहा है, जहां निवेशकों को 4-5% तक सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है।
ऐसे में विदेशी निवेशक भारत जैसे बाजारों से पैसा निकालकर अमेरिका की तरफ लौट रहे हैं। इसका असर भारतीय बाजार में बिकवाली, रुपये पर दबाव और बढ़ती अस्थिरता के रूप में दिखाई दे रहा है।
जापान का “Yen Carry Trade” भी टूटा

भारतीय बाजार हुआ महंगा, FIIs ने शुरू की Profit Booking
पिछले कुछ वर्षों में भारतीय बाजार ने जबरदस्त तेजी दिखाई। कई सेक्टर्स में शेयरों की कीमतें कंपनियों की वास्तविक कमाई से कहीं ज्यादा तेजी से बढ़ गईं।
इसके साथ LTCG Tax, STT और अन्य टैक्स लागतों ने भी विदेशी निवेशकों का गणित बिगाड़ा। ऐसे में FIIs को दूसरे बाजार ज्यादा सस्ते और बेहतर risk-reward वाले नजर आने लगे और उन्होंने भारतीय बाजार में profit booking तेज कर दी।
घरेलू निवेशकों ने संभाला बाजार
विदेशी बिकवाली के बावजूद भारतीय बाजार पूरी तरह बिखरा नहीं। इसकी सबसे बड़ी वजह घरेलू निवेशकों की बढ़ती ताकत है।
SIP और म्युचुअल फंड निवेश लगातार रिकॉर्ड बना रहे हैं। हर महीने 31 हजार करोड़ से ज्यादा का SIP निवेश यह साबित कर रहा है कि अब भारतीय निवेशक बाजार के सबसे बड़े सहारे बन चुके हैं।
निवेश अब शौक नहीं, मजबूरी भी बन रहा
महंगाई, महंगी शिक्षा, बढ़ते मेडिकल खर्च और नौकरी की अनिश्चितता ने मिडिल क्लास की चिंता बढ़ा दी है।
आज लोग सिर्फ अमीर बनने के लिए निवेश नहीं कर रहे, बल्कि अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बाजार की तरफ भाग रहे हैं। SIP अब wealth creation से ज्यादा financial survival का जरिया बनती जा रही है।
सिर्फ शेयर बाजार नहीं, मजबूत सिस्टम भी जरूरी
विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल बाजार की तेजी देश को आर्थिक रूप से सुरक्षित नहीं बना सकती। मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था, सस्ती शिक्षा, रोजगार की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा उतनी ही जरूरी हैं।
जिस दिन लोगों को अपने भविष्य की बुनियादी सुरक्षा महसूस होने लगेगी, उस दिन निवेश डर की मजबूरी नहीं बल्कि समझदारी और आत्मविश्वास का फैसला बनेगा।

क्या होती है FII Selling?
FII Selling का मतलब है विदेशी संस्थागत निवेशकों (Foreign Institutional Investors) द्वारा भारतीय शेयर बाजार में अपने निवेश को बेचना। ये बड़े विदेशी फंड, बैंक, इंश्योरेंस कंपनियां और निवेश संस्थान होते हैं जो भारत समेत कई देशों के बाजारों में पैसा लगाते हैं। जब वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां बदलती हैं, डॉलर मजबूत होता है या दूसरे देशों में बेहतर और सुरक्षित रिटर्न मिलने लगते हैं, तब ये निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं। लगातार FII Selling होने पर बाजार में दबाव बढ़ता है और सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट देखने को मिल सकती है।

 

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