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विदेशी तेल पर बढ़ती निर्भरता: भारत की अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

89% तक पहुंची तेल आयात पर निर्भरता


भारत लगातार दुनिया की बड़ी आर्थिक ताकत बनने की ओर बढ़ रहा है, लेकिन ऊर्जा के मोर्चे पर तस्वीर अब भी चिंताजनक बनी हुई है। देश की crude oil import पर निर्भरता हर साल बढ़ती जा रही है। साल 2004 में भारत अपनी जरूरत का करीब 70% कच्चा तेल विदेशों से मंगाता था, जबकि आज यह आंकड़ा बढ़कर लगभग 89% तक पहुंच चुका है। यानी देश की ऊर्जा जरूरतें अब पहले से कहीं ज्यादा विदेशी बाजारों पर निर्भर हो गई हैं।
युद्ध और वैश्विक तनाव का सीधा असर भारत पर
भारत में पेट्रोल-डीज़ल के दाम, महंगाई, रुपये की स्थिति और व्यापार घाटा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों से तय होते हैं। दुनिया में कहीं भी युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव या तेल संकट पैदा होता है तो उसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर दिखाई देता है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के दौरान तेल कीमतों में आई तेजी ने इसका बड़ा उदाहरण पेश किया।
महंगा तेल बढ़ा सकता है महंगाई का दबाव
जब crude oil महंगा होता है तो केवल पेट्रोल-डीज़ल ही नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ, उद्योग और रोजमर्रा की चीजों की लागत भी बढ़ जाती है। इससे महंगाई बढ़ती है और आम आदमी की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है। साथ ही सरकार पर सब्सिडी और आर्थिक संतुलन बनाए रखने का दबाव भी बढ़ जाता है।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता अब सबसे बड़ी जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अब renewable energy, electric vehicles, ethanol blending और घरेलू तेल-गैस उत्पादन पर तेजी से काम करना होगा। अगर आने वाले वर्षों में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता नहीं बढ़ी, तो वैश्विक संकटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर लगातार भारी पड़ सकता है।
बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए ऊर्जा सुरक्षा जरूरी
भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है, लेकिन ऊर्जा सुरक्षा के बिना यह सफर आसान नहीं होगा। मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है कि देश विदेशी तेल पर निर्भरता कम करे और घरेलू ऊर्जा संसाधनों को तेजी से बढ़ावा दे।

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